
सुबह के खूबसूरत लम्हे ,
सुरमई सड़कों पे कुछ पत्ते गिरे हुए थे,
पेड़ भी ख्वाब आलूद कुछ नींद में मालूम होते थे,
आसमां ने ज़मीं को ग़ौर से देखा ,
ज़मीन भी खिलखिला के हंस पड़ी जैसे ,
परिंदे भी साथ देने लगे ,
वो भी कुछ गुनगुनाने लगे ,
नर्म बहती हवा का एक झोंका ,
मेरे गलों को छू सा गया ,
शायद कोई पैग़ाम था वो,
बे निशान बे नाम था वो,
फूलों ने गुसले सेहत किया था जैसे ,
उनके नाज़ुक बदनों से
कुछ फिसलते हुए कतरे ,
नीचे सब्ज़ घांस में में जज़्ब हो रहे थे ,
मैं भी उनके पास जा के बैठ गया ,
ख़ामोशी से बातें करने लगा,
फिर अचानक ये ख्याल दिल में आया,
ऐ खुदा तेरी दुनिया भी जन्नत है ,तो तेरी जन्नत क्या है ?